RISS – सामाजिक सेवा के माध्यम से भारत का पुनर्निर्माण
(Recreating India through Social Service) दो अनिवार्य स्तंभ (Two Compulsory Pillars) 1. स्वयं का विकास (Self Development) प्रत्येक स्वयंसेवक का प्रथम दायित्व है कि वह अपने व्यक्तित्व, ज्ञान, चरित्र और क्षमताओं का निरंतर विकास करे। A. ज्ञान एवं कौशल विकास - अध्ययन एवं सतत् सीखने के माध्यम से अपने ज्ञान में वृद्धि करना। - व्यावसायिक, तकनीकी एवं संचार कौशल का विकास करना। - नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता तथा समस्या-समाधान कौशल को विकसित करना। B. चरित्र निर्माण - बुरी आदतों, नशे एवं नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग करना। - ईमानदारी, अनुशासन, समयपालन, उत्तरदायित्व एवं नैतिक मूल्यों को अपनाना। - आत्मसंयम, सकारात्मक सोच एवं सद्व्यवहार का विकास करना। C. शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य - नियमित व्यायाम, योग एवं खेलकूद को अपनाना। - ध्यान (Meditation) एवं तनाव प्रबंधन का अभ्यास करना। - संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाना। D. वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता - धन के उचित प्रबंधन, बचत एवं वित्तीय योजना बनाना सीखना। - डिजिटल तकनीकों एवं साइबर सुरक्षा का ज्ञान प्राप्त करना। - तकनीक का जिम्मेद...